राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर भोपाल में मंथन: डॉ. अतुल कोठारी बोले- मानसिक तनाव का प्रभावी समाधान योग ही है
भोपाल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर राष्ट्रीय कार्यशाला: योग को बताया मानसिक तनाव का प्रभावी समाधान, 30 संस्थानों से हुए एमओयू
भोपाल। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के प्रभावी क्रियान्वयन और भविष्य की शिक्षा व्यवस्था पर मंगलवार को भोपाल स्थित प्रशासन अकादमी में राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई। “उभरते ज्ञान क्षेत्र, उन्नत पाठ्यक्रम : दृष्टि, दिशा एवं क्रियान्वयन” विषय पर हुई इस कार्यशाला में शिक्षा, अनुसंधान, कौशल विकास और तकनीक आधारित शिक्षण पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम के दौरान उच्च शिक्षा विभाग ने देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ 30 एमओयू पर हस्ताक्षर भी किए।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी ने कहा कि आज पूरी दुनिया मानसिक तनाव जैसी गंभीर चुनौती का सामना कर रही है और इसका सबसे प्रभावी समाधान योग है। उन्होंने कहा कि भारतीय जीवन मूल्यों से दूरी बढ़ने के कारण समाज में कई नई समस्याएं सामने आई हैं। उनके अनुसार विकसित भारत का मजबूत आधार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा है, जो ज्ञान, चरित्र और कौशल के संतुलन से ही पूर्ण मानी जाती है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति युवाओं को नैतिक मूल्यों से जोड़ने का कार्य कर रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि नई शिक्षा नीति के माध्यम से विद्यार्थी आधुनिक समय की आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षित और प्रशिक्षित होकर प्रदेश तथा देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि नीति लागू होने के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने इसके विभिन्न पहलुओं पर उल्लेखनीय कार्य किए हैं।
उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने बताया कि राज्य सरकार भारतीय ज्ञान परंपरा को पाठ्यक्रमों का हिस्सा बना रही है। उनका कहना था कि नई शिक्षा नीति का उद्देश्य केवल शैक्षणिक ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में कौशल विकास को भी बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को उद्योगों की जरूरतों और विद्यार्थियों के बेहतर प्लेसमेंट के अनुरूप तैयार किया जा रहा है।
जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए बहुविषयक शिक्षा जरूरी
भारतीय मौसम विभाग के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्रा ने कहा कि वर्तमान समय में मल्टी-डिसिप्लिनरी शिक्षा की आवश्यकता पहले से अधिक है। उन्होंने बताया कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव पारिस्थितिकी तंत्र पर स्पष्ट दिखाई दे रहा है, इसलिए शिक्षा में वैज्ञानिक सोच और आपदा प्रबंधन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने वर्ष 2030 तक ऐसा इकोसिस्टम विकसित करने पर जोर दिया, जो समय रहते प्राकृतिक आपदाओं की सटीक चेतावनी देने में सक्षम हो। साथ ही मौसम विभाग ने शोधार्थियों को आवश्यक डेटा उपलब्ध कराने का भरोसा भी दिया।
उच्च शिक्षा में एआई और डिजिटल तकनीक पर बढ़ा फोकस
उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने बताया कि पिछले दो वर्षों में बड़ी संख्या में सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति होने से महाविद्यालयों में फैकल्टी की कमी काफी हद तक दूर हुई है। उन्होंने कहा कि विभाग अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इंजीनियरिंग, डिजिटल तकनीक और फैकल्टी डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दे रहा है।
30 राष्ट्रीय संस्थानों के साथ हुए समझौते
कार्यक्रम के दौरान उच्च शिक्षा विभाग ने आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी मद्रास, आईआईटी गुवाहाटी, आईआईटी (बीएचयू) वाराणसी, आईआईटी रुड़की, आईआईटी खड़गपुर, आईआईटी इंदौर, भारत मौसम विज्ञान विभाग, अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान, मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, ट्रॉपिकल फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट, एएमपीआरआई, भारतीय वन प्रबंधन संस्थान, भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान, केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय, मध्यप्रदेश पुलिस, श्रम विभाग, राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान तथा क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान भोपाल सहित कुल 30 संस्थानों के साथ एमओयू किए।
इन समझौतों का उद्देश्य उच्च शिक्षा को उद्योग, अनुसंधान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल स्किल, जलवायु अध्ययन, पर्यावरण संरक्षण, साइबर सुरक्षा, स्टार्टअप, सुशासन और रोजगार से जोड़ना है, ताकि विद्यार्थियों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर करियर के अवसर उपलब्ध कराए जा सकें।