जनधन योजना पर सीएम मोहन यादव का कांग्रेस पर निशाना, बोले- जिस योजना का उड़ाया गया था मजाक, आज उससे 80 करोड़ गरीबों को मिल रहा सीधा लाभ
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की आर्थिक नीतियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनकल्याणकारी योजनाओं की तुलना करते हुए कांग्रेस पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गरीबों के लिए जीरो बैलेंस पर जनधन खाते खोलने की पहल की थी, तब इस योजना पर सवाल उठाए गए और इसका मजाक भी बनाया गया। लेकिन आज यही योजना करोड़ों जरूरतमंद लोगों तक सरकारी सहायता सीधे पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन चुकी है।
मुख्यमंत्री भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित दक्षिण पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के ‘प्रतिभा सम्मान समारोह’ को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर 591 मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जमीनी हकीकत को समझते हुए ऐसी व्यवस्था बनाई, जिससे अब 80 करोड़ से अधिक गरीबों को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए बिना किसी बिचौलिये के लाभ मिल रहा है।
लगातार तीसरे वर्ष हुआ प्रतिभाओं का सम्मान
इस कार्यक्रम का आयोजन दक्षिण पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी द्वारा किया गया। समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके साथ ट्रिपलआईटी के डायरेक्टर डॉ. आशुतोष कुमार सिंह तथा मिनी मेहरा भी मंच पर मौजूद रहे।
कार्यक्रम की जानकारी देते हुए विधायक भगवानदास सबनानी ने बताया कि क्षेत्र के मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित करने की यह पहल लगातार तीसरे वर्ष जारी है। पहले वर्ष 350 और दूसरे वर्ष 480 विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया था, जबकि इस वर्ष 591 प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया है। उनका कहना था कि इससे अन्य युवाओं को भी उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरणा मिलेगी।
प्रतिभाओं का सम्मान समाज को नई दिशा देता है: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह केवल पुरस्कार वितरण का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि मेहनत और प्रतिभा का सम्मान करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक माहौल तैयार करते हैं और युवाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
भारतीय संस्कृति का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने एक विदेशी घटना का उदाहरण भी साझा किया। उन्होंने कहा कि एक देश के राष्ट्राध्यक्ष ने शवयात्रा के दौरान ऐसा बयान दिया था कि यदि चाहते तो वहां मौजूद पूरी नेतृत्व टीम को समाप्त किया जा सकता था। इस पर उसी देश के लोगों ने उन्हें बताया कि यह उनकी सोच हो सकती है, लेकिन भारतीय संस्कृति में ऐसे संवेदनशील अवसरों पर इस प्रकार की सोच या टिप्पणी की कोई परंपरा नहीं है।
मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी की नीतियों का किया उल्लेख
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि लंबे समय तक यह स्वीकार किया जाता रहा कि केंद्र सरकार से गरीबों के लिए भेजा गया एक रुपया भ्रष्टाचार के कारण लाभार्थी तक पहुंचते-पहुंचते केवल 15 पैसे रह जाता था।
उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, जो वित्तीय मामलों के बड़े जानकार और भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर भी रहे, उनका कहना था कि जीरो बैलेंस बैंक खाता खोलने में बैंक को 37 रुपये का खर्च आता है। मुख्यमंत्री के अनुसार, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनधन योजना शुरू करने की घोषणा की, तब इस पहल का उपहास उड़ाया गया था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि साधारण परिवार से आने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिचौलियों की व्यवस्था को समाप्त करने का संकल्प लिया। परिणामस्वरूप आज देश में 80 करोड़ से अधिक गरीबों के बैंक खाते संचालित हैं और सरकारी योजनाओं का लाभ डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके खातों में पहुंचाया जा रहा है।