एमपी से बनारस-पटना के लिए फ्लाइट की तैयारी, हेलीपैड निर्माण को मिलेगी प्राथमिकता
मध्यप्रदेश में हवाई और हेली सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में सरकार ने बड़ा फोकस तय किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि राज्य के विकसित हो रहे मेट्रोपॉलिटन और औद्योगिक क्षेत्रों में हेलीपैड निर्माण को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी भी बढ़ाई जाएगी, ताकि हेलीकॉप्टर सेवाओं का दायरा तेजी से बढ़ सके।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश से बनारस और पटना जैसे प्रमुख धार्मिक शहरों के लिए सीधी विमान सेवाएं शुरू करने की दिशा में प्रयास तेज किए जाएं। इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश
उज्जैन एयरपोर्ट के विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने तय समय में सभी काम पूरे करने के दिए। अधिकारियों ने बताया कि एयरफील्ड का क्षेत्रफल 95 एकड़ है और इसे 2700 मीटर रनवे के साथ कुल 4100 मीटर लंबाई में विकसित किया जाएगा। भूमि अधिग्रहण के लिए 590 करोड़ रुपए की मुआवजा राशि स्वीकृत हो चुकी है। सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए एयरपोर्ट को विशेष रूप से उपयोगी बनाया जा रहा है।
बैठक में पीएमश्री हेली पर्यटन सेवा पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि विमानन क्षेत्र के विस्तार के साथ कुशल पायलट और प्रशिक्षित स्टाफ की जरूरत बढ़ेगी। नई शिक्षा नीति के तहत एविएशन कोर्स को रोजगार से जोड़ते हुए युवाओं को इसका लाभ दिलाने के निर्देश भी दिए गए।
रीवा से 24 हजार यात्रियों ने उठाया हवाई सेवा का लाभ
मध्यप्रदेश नागरिक विमानन नीति-2025 के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। फरवरी 2025 में लागू इस नीति के तहत विमानन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कई प्रोत्साहन दिए गए हैं इसी का असर है कि पिछले छह महीनों में रीवा से 24 हजार यात्रियों ने हवाई सेवा का लाभ उठाया है।
वर्तमान में रीवा से दिल्ली, रायपुर और इंदौर के लिए नियमित उड़ानें संचालित हो रही हैं। इंदौर रूट पर ऑक्यूपेंसी 85 प्रतिशत, रायपुर रूट पर 80 प्रतिशत से अधिक और दिल्ली रूट पर 70 प्रतिशत से ज्यादा दर्ज की गई है जो हवाई सेवाओं की बढ़ती मांग को दर्शाता है।
बैठक में अपर मुख्य सचिव विमानन विभाग संजय कुमार शुक्ला, मुख्यमंत्री के सचिव आलोक कुमार सिंह और वित्त सचिव लोकेश जाटव सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।