मेधावी छात्रों को ई-स्कूटी, CM ने जाना करियर का सपना, किसी ने CA तो किसी ने डॉक्टर बनने की बताई इच्छा
भोपाल। मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों के मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए शनिवार को भोपाल में राज्य स्तरीय स्कूटी वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 7400 से अधिक विद्यार्थियों को ई-स्कूटी और मोटराइज्ड वाहन खरीदने के लिए राशि वितरित की। पात्र विद्यार्थियों के बैंक खातों में यह रकम सीधे ट्रांसफर की गई। कार्यक्रम के दौरान कुछ विद्यार्थियों को मुख्यमंत्री ने मंच से प्रतीकात्मक रूप से चाबी भी सौंपी और उनका सम्मान किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों को स्कूटी मिलना उनकी मेहनत और उपलब्धि का सम्मान है। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे आज CA, डॉक्टर, वकील सहित कई क्षेत्रों में करियर बनाने का सपना देख रहे हैं। डॉ. यादव के मुताबिक प्रतिभा के रास्ते में आर्थिक स्थिति बाधा नहीं बन सकती। मेहनत और योग्यता के दम पर साधारण परिवार में जन्म लेने वाला बच्चा भी जीवन में बड़ी सफलता हासिल कर सकता है।
मुख्यमंत्री ने छात्रों से पूछा- भविष्य में क्या बनना है
कार्यक्रम में डॉ. मोहन यादव ने स्कूटी पाने वाले कई विद्यार्थियों से बातचीत की और उनके करियर प्लान के बारे में जानकारी ली। भोपाल की खुशी राय ने बताया कि वह B.Com की पढ़ाई के साथ CA की तैयारी कर रही हैं।
95 प्रतिशत अंक हासिल करने वाले शब्द अहिरवार ने भी CA बनने की इच्छा जताई। उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता नहीं हैं और वह अपने चाचा-चाची के साथ रहते हैं।
वहीं, 95.2 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले आकाश साहू ने बताया कि वह एग्रीकल्चर की पढ़ाई कर रहे हैं और आगे चलकर एग्रीकल्चर स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं। उनके पिता गेहूं और सोयाबीन की खेती करते हैं। आकाश ने ऑनलाइन क्विक कॉमर्स के माध्यम से फल और सब्जियों की सप्लाई का काम शुरू करने की योजना भी मुख्यमंत्री के सामने रखी।
81 प्रतिशत अंक हासिल करने वाली सानिया ने CA बनने को अपना लक्ष्य बताया। उसने बताया कि उसके पिता ऑटो चलाते हैं, जबकि मां गृहिणी हैं। बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने सानिया को हेलमेट पहनकर सुरक्षित तरीके से वाहन चलाने की सलाह दी।
स्कूल शिक्षा के लिए 38 हजार करोड़ का बजट
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश में स्कूल शिक्षा के बजट में हुई बढ़ोतरी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 1956 से 2003 के बीच स्कूल शिक्षा विभाग का बजट करीब 2600 करोड़ रुपए था, जबकि इस साल स्कूल शिक्षा के लिए 38 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना और उन्हें आगे बढ़ने के समान अवसर देना है। उनके मुताबिक स्कूटी मिलने से विद्यार्थियों के साथ उनके माता-पिता में भी खुशी और गर्व का भाव पैदा होता है।
पुरानी और मौजूदा स्कूल व्यवस्था का किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस सरकार के दौर की स्कूल व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय विद्यार्थियों को स्कूल में बैठने के लिए घर से बोरा तक लाना पड़ता था। उन्होंने कहा कि अब सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं और आगे बढ़ने के अधिक अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं डॉ. यादव ने यह भी कहा कि प्रदेश में ड्रॉपआउट शून्य होने की स्थिति बनी है। उन्होंने संदीपनी विद्यालयों की मेरिट में 70 फीसदी विद्यार्थियों के सरकारी स्कूलों से होने का भी उल्लेख किया।
मोदी सरकार की योजनाओं का भी किया उल्लेख
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह विदेश से वित्त की पढ़ाई करके भारत लौटे और आगे चलकर रिजर्व बैंक के गवर्नर, वित्त मंत्री तथा प्रधानमंत्री बने। डॉ. यादव ने जनधन योजना के जरिए गरीबों के बैंक खाते खोले जाने और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी DBT के माध्यम से सरकारी योजनाओं की राशि सीधे लाभार्थियों तक पहुंचने की बात कही। उन्होंने कोरोना काल में भारत में हुए मुफ्त टीकाकरण का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि देश का भविष्य उनके हाथों में है। उन्होंने स्कूटी प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को आगे भी मेहनत जारी रखने और अपने निर्धारित लक्ष्य हासिल करने के लिए शुभकामनाएं दीं।