पहली बार बनेगी दिव्यांगजन नीति: 10 लाख लोगों को मिलेगा एकीकृत लाभ, 180 दिन में तैयार होगा ड्राफ्ट

मध्यप्रदेश में पहली बार दिव्यांगजनों के लिए समग्र नीति तैयार की जाएगी। राज्य सरकार ने करीब 10 लाख दिव्यांग नागरिकों के हित में यह बड़ा फैसला लिया है, ताकि अलग-अलग विभागों की योजनाओं को एक मंच पर लाकर समान रूप से लागू किया जा सके। अभी तक विभिन्न विभाग अपनी-अपनी योजनाओं के जरिए अलग-अलग तरीके से लाभ दे रहे हैं, जिससे एकरूपता की कमी बनी हुई है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर इस नीति का मसौदा तैयार करने की जिम्मेदारी दिव्यांगजन विभाग के आयुक्त डॉ. अजय खेमरिया को सौंपी गई है। तय समयसीमा के अनुसार, ड्राफ्ट 6 महीने यानी करीब 180 दिनों में तैयार कर लिया जाएगा।

डॉ. खेमरिया ने बताया कि प्रदेश में अब तक दिव्यांगजनों के लिए कोई एकीकृत नीति नहीं रही, जिसके कारण समग्र विकास के प्रयास बिखरे हुए नजर आते हैं। इसी कमी को दूर करने के लिए यह पहल की जा रही है, ताकि सभी विभाग एक समान दिशा में काम कर सकें।

सभी वर्गों से लिया जाएगा सुझाव

नीति निर्माण के दौरान विशेषज्ञों, स्टेकहोल्डर्स और स्वयं दिव्यांगजनों से बातचीत की जाएगी। विश्वविद्यालयों के शोधकर्ताओं और अंतरराष्ट्रीय अनुभव रखने वाले विशेषज्ञों की राय भी शामिल होगी। ग्रामीण, शहरी और आदिवासी क्षेत्रों—जैसे अलीराजपुर, झाबुआ और बड़वानी—में योजनाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन कर वहां की चुनौतियों को भी समझा जाएगा।

अलग-अलग विभागों के अलग नियम, अब होगी एकरूपता

फिलहाल सामाजिक न्याय, MSME, NRLM, महिला एवं बाल विकास जैसे विभाग अपने-अपने मानकों पर काम कर रहे हैं। नई नीति लागू होने के बाद इन सभी के प्रयासों को एक दिशा दी जाएगी। ड्राफ्ट तैयार होने के बाद इसे कैबिनेट से मंजूरी दिलाकर 2026 में ही लागू करने की योजना है।

फरवरी में भेजा गया था प्रस्ताव

डॉ. खेमरिया ने बताया कि फरवरी 2026 में मुख्यमंत्री को इस संबंध में पत्र भेजा गया था, जिसे अब स्वीकृति मिल चुकी है। सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह को भी इस विषय में पत्र लिखा गया था। अब सुझाव और प्रस्ताव जुटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

व्यापक दायरे में बनेगी नीति

13 अप्रैल 2026 को विभाग की ओर से निर्देश जारी कर दिव्यांगजन अधिनियम 2016, राज्य निधि, पुनर्वास, कल्याण और अन्य योजनाओं को शामिल करते हुए नीति प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है। इस प्रक्रिया में सरकारी-अर्द्धसरकारी संस्थाएं, सिविल सोसायटी, खिलाड़ी और सांस्कृतिक प्रतिभाएं भी भाग लेंगी।

अन्य राज्यों का भी होगा अध्ययन

नई नीति को अंतिम रूप देने से पहले तेलंगाना, त्रिपुरा समेत अन्य राज्यों की व्यवस्थाओं का अध्ययन किया जाएगा।

प्रमुख बिंदु:

  • प्रदेश में करीब 10 लाख दिव्यांगजन दर्ज (जनगणना 2011 व UDID के आधार पर)
  • अगली जनगणना में संख्या बढ़ने की संभावना (7 से बढ़कर 21 श्रेणियां)
  • 18 वर्ष से अधिक मानसिक दिव्यांगों के लिए संभाग स्तर पर 100 बिस्तरों वाले आश्रय गृह प्रस्तावित
  • शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय विभाग की योजनाओं को किया जाएगा एकीकृत

इस नई नीति से उम्मीद है कि दिव्यांगजनों के जीवन स्तर में वास्तविक सुधार होगा और उन्हें योजनाओं का लाभ एक व्यवस्थित और प्रभावी तरीके से मिल सकेगा।

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