नकली बीज और पेस्टिसाइड पर केंद्र सख्त, 1 जून से शुरू होगा ‘खेत बचाओ अभियान’

केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने भुवनेश्वर में आयोजित पूर्वी क्षेत्रीय खरीफ कृषि जोनल कॉन्फ्रेंस के दौरान किसानों के हित में कई अहम घोषणाएं कीं। उन्होंने बताया कि देशभर में 1 जून से “खेत बचाओ अभियान” शुरू किया जाएगा। इसके साथ ही नकली पेस्टिसाइड और घटिया बीज पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार सख्त कानून लाने की तैयारी में है।

कॉन्फ्रेंस के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पूर्वी भारत की कृषि क्षमता को मजबूत करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर क्षेत्रवार और फसल आधारित रोडमैप तैयार करेंगी। उनका कहना था कि खेती को आधुनिक और टिकाऊ बनाने के लिए नई रणनीतियों पर तेजी से काम किया जा रहा है।

1 जून से चलेगा ‘खेत बचाओ अभियान’

1 जून से 15 जून तक चलने वाले “खेत बचाओ अभियान” के जरिए किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, मिट्टी की गुणवत्ता और वैज्ञानिक खेती के तरीकों के प्रति जागरूक किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरत से अधिक रासायनिक खाद का इस्तेमाल खेती की लागत बढ़ाने के साथ मिट्टी और स्वास्थ्य दोनों को नुकसान पहुंचाता है। इसलिए किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर ही उर्वरकों का उपयोग करने की सलाह दी गई है।

नकली पेस्टिसाइड और खराब गुणवत्ता वाले बीजों पर सरकार सख्त कानून लाने की तैयारी

केंद्रीय मंत्री ने नकली पेस्टिसाइड और खराब गुणवत्ता वाले बीजों को किसानों के लिए गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि मौजूदा कानून पर्याप्त प्रभावी नहीं हैं, इसलिए नया पेस्टिसाइड एक्ट और नया सीड एक्ट लाने की दिशा में काम चल रहा है। सरकार चाहती है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो और किसानों तक गुणवत्तापूर्ण कृषि सामग्री पहुंचे।

दलहन-तिलहन उत्पादन बढ़ाने पर रहेगा जोर

उन्होंने यह भी कहा कि देश धान और गेहूं उत्पादन में मजबूत स्थिति में पहुंच चुका है, लेकिन दलहन और तिलहन के क्षेत्र में अभी आत्मनिर्भर बनने की जरूरत है। पूर्वी भारत की खाली पड़ी राइस फेलो भूमि को दलहन और तिलहन उत्पादन के लिए उपयोगी बताया गया। सरकार बेहतर बीज, डेमोंस्ट्रेशन, किसानों को प्रोत्साहन और पीएम-आशा योजना के तहत खरीद व्यवस्था को मजबूत करेगी। साथ ही दाल और तेल मिलों की स्थापना के लिए सब्सिडी देने की योजना पर भी जोर दिया गया।

छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाने के लिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल को बढ़ावा देने की बात भी कही गई। इसके तहत खेती के साथ फल-सब्जी उत्पादन, पशुपालन, मछली पालन, मधुमक्खी पालन और एग्रो फॉरेस्ट्री को जोड़ने पर फोकस रहेगा, ताकि किसानों की आय के कई स्रोत तैयार हो सकें।

इंटीग्रेटेड फार्मिंग के जरिए छोटे किसानों को मजबूत बनाने पर

शिवराज सिंह चौहान ने फार्मर आईडी को कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने वाली पहल बताया। उनके मुताबिक इससे किसानों की जमीन, फसल और परिवार से जुड़ी जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी। इसके जरिए ऋण, डीबीटी, सरकारी योजनाओं का लाभ और खाद वितरण व्यवस्था अधिक पारदर्शी और तेज बनाई जा सकेगी।

उन्होंने पूर्वी भारत में हॉर्टिकल्चर सेक्टर की संभावनाओं का भी जिक्र किया और कहा कि आम सहित कई बागवानी फसलें किसानों की आमदनी बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। कोल्ड स्टोरेज और कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने बताया कि सरकार एमआईडीएच, एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड और किसान संपदा जैसी योजनाओं के जरिए इस दिशा में तेजी से काम कर रही है।

फार्मर आईडी बनेगी कृषि प्रणाली में बदलाव का आधार

केंद्रीय मंत्री ने खेती को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य किसानों की जिंदगी को सुरक्षित, समृद्ध और सम्मानजनक बनाना है। उत्पादन बढ़ाने, लागत घटाने और खेती में विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और राज्य मिलकर काम करेंगे।

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