MP में ‘स्कूल चलें हम’ शुरू: 92 हजार स्कूलों में एडमिशन ड्राइव, ड्रॉपआउट बच्चों की वापसी
मध्यप्रदेश में नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत।
1 अप्रैल से नए सत्र 2026-27 की शुरुआत, चार दिन तक चलेंगे विशेष कार्यक्रम; नामांकन बढ़ाने और हर बच्चे को स्कूल से जोड़ने पर फोकस है। बुधवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने टीटीनगर स्थित सांदीपनि विद्यालय में राज्य स्तरीय प्रवेश उत्सव का उद्घाटन किया। इस अवसर पर बच्चों पर पुष्प वर्षा की गई और उन्हें साइकिलें भी वितरित की गईं। कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा मंत्री उदय राव प्रताप, मंत्री विश्वास सारंग, विजय शाह और कृष्णा गौर सहित कई जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। राज्य के लगभग 92 हजार सरकारी स्कूलों और करीब 85 लाख विद्यार्थियों वाले इस तंत्र में नामांकन बढ़ाने, स्कूल छोड़ चुके बच्चों को दोबारा जोड़ने और शिक्षा के प्रति सकारात्मक माहौल तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए राज्य से लेकर गांव स्तर तक विस्तृत योजना बनाई गई है।
अब कोई बच्चा नहीं छूटेगा: अभियान का ग्राउंड प्लान
स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी कलेक्टरों और जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि कार्यक्रमों को व्यवस्थित और प्रभावी तरीके से संचालित किया जाए। बस्तियों और गांवों में शिक्षा से जुड़े बिना रह गए बच्चों की पहचान होगी अभियान के पहले दिन बालसभाओं के माध्यम से बच्चों को स्कूल से जोड़ा जा रहा है। दूसरे दिन “भविष्य से भेंट” कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ विद्यार्थियों से संवाद करेंगे। तीसरे दिन सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों के जरिए अभिभावकों की भागीदारी बढ़ाई जाएगी, जबकि चौथे दिन पढ़ाई में पिछड़ रहे बच्चों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इस अभियान का एक अहम हिस्सा उन बच्चों की पहचान करना है जो अभी तक स्कूल नहीं पहुंच पाए हैं।
हर घर सर्वे से स्कूल तक: हर बच्चे को जोड़ने की जमीनी पहल
इसके लिए गांवों और बस्तियों में सर्वे किया जा रहा है। शिक्षकों और प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि हर बच्चे को स्कूल से जोड़ने का प्रयास किया जाए। साथ ही अभिभावकों का स्वागत कर उन्हें शिक्षा के महत्व के बारे में जागरूक किया जाएगा। शुरुआत बालसभा से, बच्चों के हाथों में नई किताबें पहले दिन यानी 1 अप्रैल को सभी स्कूलों में बालसभाएं आयोजित की जा रही हैं, जहां बच्चों को मुफ्त पाठ्य-पुस्तकें दी जा रही हैं ताकि उनकी पढ़ाई बिना किसी बाधा के शुरू हो सके। इसके अलावा विशेष भोजन की व्यवस्था भी की गई है, जिससे बच्चों में उत्साह बना रहे।दूसरे दिन छात्रों को प्रेरित करने पर विशेष जोर रहेगा। खिलाड़ी, कलाकार, अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता स्कूलों में पहुंचकर अपने अनुभव साझा करेंगे और बच्चों को शिक्षा के महत्व से अवगत कराएंगे।
उत्सव से सुधार की तरफ
तीसरे दिन 3 अप्रैल को सांस्कृतिक और खेलकूद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें अभिभावकों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। इस दौरान उन्हें सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी और शिक्षा में उनकी भूमिका को मजबूत करने पर बल दिया जाएगा। जिन बच्चों की उपस्थिति 85 प्रतिशत से अधिक रही है, उनके अभिभावकों को सम्मानित भी किया जाएगा। कमजोर विद्यार्थियों पर रहेगा विशेष फोकस अभियान के अंतिम दिन ऐसे विद्यार्थियों की पहचान की जाएगी जो कक्षोन्नति प्राप्त नहीं कर सके हैं। उनके अभिभावकों को समझाया जाएगा कि असफलता अंत नहीं है, बल्कि निरंतर प्रयास से सफलता प्राप्त की जा सकती है। साथ ही शाला प्रबंधन समिति की बैठक में नए सत्र की कार्ययोजना तैयार की जाएगी, जिसमें शत-प्रतिशत नामांकन और ड्रॉपआउट दर कम करने पर विशेष ध्यान रहेगा।